सावन सोमवार में शिवपुराण पाठ के नियम और विधि – सावन मास को भगवान शिव का मॉस भी कहते है। सावन माह पूर्णरूप भगवान शिव को समर्पित है। इस माह में भगवान शिव की बड़े धूमधाम से पूजा और आह्वाहन किया जाता है। सावन में शिव पुराण जैसे काव्य के पाठ का बहुत मान्यता है। शिव पुराण के पाठ से व्यक्ति के जीवन में खुश और चैन का आगमन होता है और सभी के अधूरे काम बन जाते हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनके आशीर्वाद के लिए शिवपुराण का पाठ बहुत जरूरी है। लेकिन शिव पुराण का जाप करते वक़्त कई सारे नियमों का पालन करना पड़ता है। इसीलिए आज हम इन नियमों के विषय में विस्तार पूर्वक वर्णन करेंगे।

सावन सोमवार में शिवपुराण पाठ के नियम
- शिव पुराण का जाप करने व सुनने से पहले आपके मन में किसी के प्रति घृणा, द्वेष, निंदा का भाव नहीं होना चाहिए अन्यथा पुण्य समाप्त हो जाते हैं।
- शिव पुराण कथा के दौरान यदि आप गृहस्थ जीवन में हैं तो ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस समयावधि में व्यक्ति को जमीन पर सोना चाहिए।
- पाठ के समयाविधि के बाद पूर्णरूप से सात्विक और संतुलित भोजन ग्रहण करना चाहिए और तामसिक भोजन से दूरी बना लेना चाहिए।
- शिव पुराण का जाप पढ़ने या सुनने से पहले आप अपने आप को मानसिक व शारीरिक रूप से शुद्ध करें तथा साफ तथा स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- शिव पुराण के पाठ समय मांसहार-मदिरा, लहसुन, प्याज, हींग, बैंगन और नशीली वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
- आपके मन में भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और प्रेम का भाव होना चाहिए और किसी भी तरह का पाप में आप संलिप्त नहीं होने चाहिए।
सावन सोमवार व्रत करते समय इन नियमों का करें पालन
- सावन सोमवार के दिन जो व्रत ना भी रखता हो वो किसी भी अनैतिक कार्यो से बचना चाहिए और पूर्णरूप से बर्ह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
- सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्यकर्म के बाद भगवान का ध्यान करें।
- भगवान् शिव की पूजा करते समय बैल, गंगाजल और धतूरा अवश्य होना चाहिए।
- सावन के महीने में बैगन का सेवन न करे इसे शास्त्रों में असुद्ध मन गया है, इसके अलावा सावन में बैगन में कीड़े भी लग जाते है जो हमारे स्वास्त्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
- हिन्दू धर्म में सावन का विशेष महत्व है इस महीने में आपको मांसाहर से दूर रहना चाहिए और वैसे भी हिन्दू धर्म में जीवहत्या पाप माना जाता है।
- आपको व्रत के दिन सात्विक भोजन का का सेवन करना चाहिए और भोजन आपको व्रत समाप्त होने के बाद ही करना चाहिए।
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